26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)

हे पावन गणतंत्र दिवस,

तेरे हित कितने वीरो ने, शेखर सुभाष गोखले तिलक|

बापू से अमर शहीदों ने, हंस हंस कर बलिदान दिए|

फांसी पर झूला झूले थे, हे पावन २६ जनवरी तेरा नाम न भूले थे |

गणतंत्र बताओ सभी सुने,खुनी इतिहास तुम्हारा है |

कितने धुंधले इतिहास गगन से, ज्योतित हुआ सितारा है |

कितने बंदा बैरागी का, तेरे अंदर खून छिपा |

कितनी भारत ललनाओं के, माथे का सिंदूर छिपा |

कितनी वीर पद्मिनियों के, जोहर की ज्वाला जलती है|

कितने अमर शहीदों की, तेरे मैं चिता सुलगती है |

तेरे वक्षस्थल  में कितनी, बंदूकों के घाव लगे |

पापी डायर के फायर के, कितने गहरे दाग लगे |

तेरी गाथा  कितनी लंबी, ध्वजा तिरंगा बतलाता |

कितनी तेरी बातो को, सह लाल किले पर लहराता |

तेरा गौरव सदा बढे है, चिर स्वतंत्रता के प्रतिक|

वर्तमान के नवप्रकाश में,जल जाये वह तम अतीत |

अपने कर से कवि  हो हो जब, तेरा शुचि श्रंगार करेगा |

अपनी नूतन रचनाओं से, भारत भू का भार हरेगा |

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